1 दिसंबर 2018 - 15:18
बिन सलमान का दम तोड़ता सपना!!

अर्जेन्टिना की राजधानी ब्यूनेस आयरेस में जी-20 के शिखर सम्मेलन में कैमरों के लेंज़, देशों के राष्ट्राध्यक्षों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के बयान से पता चलता है कि इस बैठक में भाग लेने के पीछे सऊदी युवराज बिन सलमान का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है, क्योंकि यह बैठक अपने मूल मुद्दे से ज़्यादा बिन सलमान की हालिया गतिविधियों के बारे में चर्चा पर केन्द्रित रही।

मोहम्मद बिन सलमान ने यह दर्शाने की कोशिश की कि वह पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या और यमन जंग के कुपरिणाम से बच गए हैं लेकिन दो बातों से लगता है कि बिन सलमान जी-20 की बैठक में अपना लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहे हैं।

पहली बात यह कि पश्चिमी देशों के राष्ट्राध्यक्षों की नज़र में बिन सलमान से ज़्यादा अहमियत सऊदी अरब की है क्योंकि वे इस देश को दुधारू गाय की हैसियत से देखते हैं। उनके लिए बिन सलमान के होने या न होने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, बल्कि उनके लिए पश्चिमी बाज़ार में रियाज़ का पेट्रो डॉलर अहमियत रखता है।

दूसरी बात यह कि जी-20 के शिखर सम्मेलन के अवसर पर ह्यूमन राइट्स वॉच और एम्नेस्टी इंटरनैश्नल ने अपने अपने बयानों में यमन जंग और मानवाधिकार के उल्लंघन को लेकर जी-20 के राष्ट्राध्यक्षों से बिन सलमान पर दबाव डालने की मांग की।

ऐसा लगता है कि बिन सलमान का सऊदी अरब की शाही कुर्सी पर पहुंचने का सपना उनकी धीरे धीरे हो रही सियासी मौत से धूमिल पड़ता जा रहा है और सऊदी युवराज अपने समर्थकों के निकट अपनी स्थिति के ख़त्म होने का तमाशा देख रहे हैं। इन हालात से यह संदेश मिलता है कि आंतरिक व विदेशी राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय युद्धोन्मादियों और भूराजनैतिक स्थिति से संपन्न देशों के अपराधियों का अंजाम अच्छा नहीं होगा। नए सद्दाम के नाम से कुख्यात मोहम्मद बिन सलमान को इतिहास से यह पाठ लेना चाहिए कि एक समय पश्चिमी अधिकारियों ने सद्दाम का समर्थन किया था लेकिन अंत में सद्दाम की मौत इराक़ पर अमरीकी हमले से हुयी।